
पुष्य
🌟 राशि : कर्क
🌟 नक्षत्र देवता: गुरु
🌟 नक्षत्र स्वामी: शनि
ज्योतिषशास्त्र के अंतर्गत शनिदेव के प्रभाव वाले पुष्य नक्षत्र को सबसे शुभ माना गया है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोग दूसरों की भलाई के लिए सदैव तैयार रहते हैं और इनके भीतर सेवा भावना भी बहुत प्रबल होती है। इन्हें नित नए काम करने की प्रवृत्ति होती है और नए काम की खोज,परिवर्तन और अधिक परिश्रम इनकी विशेषता है। ये लोग मेहनती होते हैं और अपनी मेहनत के बल पर धीरे-धीरे ही सही तरक्की हासिल कर ही लेते हैं। ये लोग कम उम्र में ही कई कठिनाइयों का सामना कर लेते हैं इसलिए ये जल्दी परिपक्व भी हो जाते हैं। चंचल मन वाले ये लोग विपरीत लिंग के प्रति विशेष आकर्षण भी रखते हैं। इन्हें संयमित और व्यवस्थित जीवन जीना पसंद होता है।
शिक्षा और आय
आप थियेटर, कला और वाणिज्य व्यवसाय के क्षेत्र में सफल हो सकते हैं। इसके साथ ही डेयरी से जुड़े कार्य, कृषि, बाग़वानी, पशुपालन, खाने-पीने की सामग्री के निर्माण व वितरण, राजनीति, सांसद, विधायक, धर्मगुरु, परामर्शदाता, मनोचिकित्सक, धर्म व दान संस्था से जुड़े स्वयंसेवक के रूप में, अध्यापक, प्रशिक्षक, बच्चों की देखभाल के कार्य, प्ले स्कूल में कार्य, भवन निर्माण तथा आवास बस्ती से जुड़े कार्य, धार्मिक व सामाजिक उत्सवों के आयोजनकर्ता, शेयर बाज़ार, वित्त विभाग, जल प्रधान कार्य, सेवा से जुड़े काम, माल ढोने जैसे श्रमप्रधान कार्य करके जीवनयापन कर सकते हैं।
पारिवारिक जीवन
आप अपने जीवनसाथी और बच्चों के साथ रहना चाहेंगे, मगर नौकरी या व्यवसाय के चलते अपना अधिकतर समय अपने परिवार से दूर बिताएंगे। इसी वजह से आपका पारिवारिक जीवन कुछ समस्याग्रस्त रह सकता है, परन्तु आपका जीवनसाथी आपके प्रति समर्पित रहेगा और आपकी अनुपस्थिति में वह परिवार का ध्यान अच्छी प्रकार से रखेगा। 33 वर्ष की आयु तक आपके जीवन में कुछ संघर्ष होने की संभावना है, परन्तु 33 वर्ष की अवस्था से आपकी चतुर्मुखी प्रगति होगी।
प्रथम चरण : इसका स्वामी सूर्य है। इसमे चन्द्र, शनि, सूर्य का प्रभाव है। नवमांश सिंह। यह तीव्र प्रकाश का आकर्षण, उपलब्धता, सम्पदा, सकारात्मकता, पैतृक गर्व का द्योतक है। जातक लाल गुलाबी कान्ति वाला, बिलाव (बिल्ली) के सामान चेहरा वाला, लम्बे हाथ तथा पैर, विवाह के लिए प्रवासी, कला प्रिय होता है। जातक जबाबदारी के लिए विश्वनीय, व्यवसायिक जीवन के लिए गंभीर, परिवार के प्रति चिन्तित, विवाह मे अड़चन, दाम्पत्य जीवन दुःखद होता है। कोई-कोई जातक मजदुर होता है।
द्वितीय चरण : इस चरण का स्वामी बुध हैं। पुष्य नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्मा व्यक्ति एक से अधिक स्रोतों से धन अर्जित करता है। अपनी वाक्पटुता के कारण पक्ष विपक्ष दोनों से ही मधुर सम्बन्ध बना कर रखता है।
तृतीय चरण : इसका स्वामी शुक्र है। इसमे चन्द्र,शनि,शुक्र का प्रभाव है। नवमांश तुला। यह आराम,सुविधा, समाज प्रियता,अनुकूलता,अनुरूपता,सतही प्रगाढ़ता का द्योतक है।जातक श्याम वर्णी,स्थूल देह,धनुषाकार भौंहे,सुंदर नाक व आंख,विलासी, क्षीणभाग्य,जाति बन्धु का हित करने वाला होता है।जातक सामाजिक, यौन क्रिया का इच्छुक,पारिवारिक जीवन की अपेक्षा व्यावसायिक जीवन चाहने वाला,जीवन मे आराम और सुविधा भोगने वाला कार्य के प्रति लगनशील होता है।
चतुर्थ चरण : इस चरण का स्वामी मंगल हैं। पुष्य नक्षत्र के चौथे चरण में जन्मा व्यक्ति धार्मिक स्वभाव वाला होता है अतः जातक धार्मिक और परोपकारी कार्यों में पूर्ण रूचि दिखाते हैं। ऐसा जातक जिस भी कार्य में हाथ डालता है उसे सफलता अवश्य मिलती है।