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आर्द्रा

आर्द्रा


आर्द्रा

🌟 राशि: मिथुन

🌟 नक्षत्र देवता: रुद्र (शिव)

🌟 नक्षत्र स्वामी: राहु

इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों पर आजीवन बुध और राहु ग्रह का प्रभाव रहता है। राहु का प्रभाव इन्हें राजनीति की ओर लेकर जाता है और इनके प्रति दूसरों में आकर्षण विकसित करता है। अध्ययन में रूचि अधिक और किताबों से विशेष लगाव आपकी पहचान होगी। सदैव ही अपने आस-पास की घटनाओं के बारे में जागरूक और व्यापार करने की समझ इनकी महान विशेषता है। ये लोग दूसरों का दिमाग पढ़ लेते हैं इसलिए इन्हें बहुत आसानी से बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। दूसरों से काम निकलवाने में माहिर इस नक्षत्र में जन्में लोग अपने निजी स्वार्थ को पूरा करने के लिए नैतिकता को भी छोड़ देते हैं।

शिक्षा और आय

आपकी शिक्षा इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, ज्योतिष शास्त्र अथवा मनोविज्ञान से सम्बंधित हो सकती है। आप इलेक्ट्रोनिक इंजीनियरिंग व कंप्यूटर सम्बंधित काम, कंप्यूटर प्रोग्रामिंग के क्षेत्र, अंग्रेज़ी अनुवाद, फ़ोटोग्राफ़ी, भौतिकी व गणित का अध्यापन, अनुसंधान या शोधकार्य, दर्शन, लेखन, उपन्यास-लेखन, विष चिकित्सा, औषधि निर्माण, नेत्र व मस्तिष्क रोग निदान, यातायात, संचार विभाग, मनोचिकित्सा, गुप्तचर व रहस्य सुलझाना, फ़ास्ट फ़ूड व मादक पदार्थ आदि से जुड़े कार्य करके आजीविका कमा सकते हैं।

पारिवारिक जीवन

संभव है कि आपका विवाह ज़रा देर से हो। सुखी विवाहित जीवन हेतु किसी भी प्रकार के वाद-विवाद से आपको हमेशा बचना चाहिए अन्यथा वैवाहिक जीवन में दिक़्क़तें आ सकती हैं। नौकरी या व्यवसाय को लेकर आप परिवार से दूर रह सकते हैं। आपका जीवनसाथी आपका पूरा ध्यान रखेगा; वह घर के काम-काज में दक्ष होगा।

प्रथम चरण : इसका स्वामी गुरु है। नवमांश धनु। यह खोज-बीन, भौतिकवाद, प्रसन्नता का द्योतक है। जातक रक्त वर्ण, समशरीर, सुन्दर नाक, लम्बा चेहरा, घनी तीखी भौहे वाला होता है। वाणी प्रभावी व चातुर्यपूर्ण होती है। जातक के मन मे हमेशा संक्षोभ होता है जिससे दुविधा के कारण कुछ निश्चित नही कर पता है अतः इस तूफान के निवारण के लिए ध्यान करना चाहिए।

द्वितीय चरण : इसका स्वामी शनि है। नवमांश मकर। यह भौतिकवाद, निराशा, कष्ट का द्योतक है।जातक की भौंहे सुन्दर, बदन इकहरा, हल्का कृष्ण वर्ण, छोटा चहेरा, दीर्घ वक्ष, यौन वासना युक्त होता है। यह चरण अत्यधिक भ्रष्टाचार का द्योतक है। आर्द्रा नक्षत्र की ऋणात्मक विशेषता इस चरण मे सबसे ज्यादा होती है परन्तु जातक व्यवहारिक और भौतिक होता है। बुध और शनि शुभ स्थान में हो, तो भौतिकता कड़ी मेहनत के 32 वर्ष की उम्र पश्चात प्राप्त होती है।

तृतीय चरण : इसका स्वामी शनि है। नवमांश कुम्भ। यह विज्ञान, शोध, प्रोत्साहन, मानसिक गतिविधि का द्योतक है।जातक बड़ा मुंह, बड़ा वक्ष, मोटी कमर, लम्बी भुजा वाला, स्थूल सर वाला, कपटी, दुष्ट, उभरी शिराएं वाला, आँखो से मन की बात जानना कठिन होता है। जातक सामाजिक कार्यकर्त्ता, व्यक्तियो का शरीरिक रूप से मददगार, कर्मठ, तेज दिमाग वाला होता है।

चतुर्थ चरण : इसका स्वामी गुरु है। नवमांश मीन। यह संवेदना, अनुकम्पा, शांति का द्योतक है। जातक मादक नयन, वाचाल, चौड़ा ललाट, बलिष्ठ शरीर, गुलाबी होंठ, पीले दांत, जुआरी, दुष्ट व निरर्थक प्रलापी होता है। जातक भावुक, हास्यास्पद, दानी, बिना हिचकिचाहट के दूसरो धन से मददगार, स्थिर दिमाग, लाभदायक गतिविधियो मे सलग्न रहता है।



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