
रोहिणी
🌟 राशि: वृषभ
🌟 नक्षत्र देवता: ब्रम्हा
🌟 नक्षत्र स्वामी: चंद्र
इरोहिणी नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा होता है और चंद्रमा के प्रभाव की वजह से ये लोग काफी कल्पनाशील और रोमांटिक स्वभाव के होते हैं। ये लोग काफी चंचल स्वभाव के होते हैं और स्थायित्व इन्हें रास नहीं आता। इन लोगों की सबसे बड़ी कमी यह होती है कि ये कभी एक ही मुद्दे या राय पर कायम नहीं रहते। ये व्यक्ति सदा दूसरों में गलतियां ढूँढता रहता है। सामने वाले की त्रुटियों की चर्चा करना इनका शौक होता है। ये लोग स्वभाव से काफी मिलनसार तो होते ही हैं लेकिन साथ-साथ जीवन की सभी सुख-सुविधाओं को पाने की कोशिश भी करते रहते हैं। विपरीत लिंग के लोगों के प्रति इनके भीतर विशेष आकर्षण देखा जा सकता है। ये शारीरिक रूप से कमज़ोर होते हैं इसलिए कोई भी छोटी से छोटी मौसमी बदलाव के रोग भी आपको अक्सर जकड़ लेते हैं।
शिक्षा और आय
आप कृषि बाग़वानी या फलों के बाग़ तथा ऐसे सभी कार्य जिसमें खाद्य वस्तुओं का उगाना, उन्हें विकसित व संशोधित कर बाज़ार में पहुँचाने का काम हो – वहाँ से आप धन कमा सकते हैं। वनस्पति वैज्ञान, संगीत, कला, सौंदर्य प्रसाधन, फैशन डिज़ाइनिंग, ब्यूटी पार्लर, हीरे-जवाहरात, बहुमूल्य वस्त्र, पर्यटन, परिवहन, कार उद्योग, बैंक, वित्तीय संस्थान, तैल व पेट्रोलियम उत्पाद, वस्त्र उद्योग, जल परिवहन सेवा, खाद्य पदार्थ, फ़ास्ट फ़ूड, होटल, गन्ने का व्यवसाय, केमिकल इंजीनियर, शीतल पेय या मिनरल वाटर से सम्बंधित कार्य आदि करके आजीविका कमा सकते हैं।
पारिवारिक जीवन
आपका जीवनसाथी सुन्दर, आकर्षक और समझदार होगा तथा आपसे काफ़ी उम्मीदें रखेगा। वह आप ही की तरह भावुक और व्यवहार-कुशल होगा एवं आपका तालमेल उससे उत्तम रहेगा। आपका व्यक्तित्व मोहक व स्वभाव कोमल होगा। आप सबसे सद्व्यवहार करने वाले होंगे इसलिए आपको आदर्श कहना उचित ही होगा। आप अपने परिवार का भरपूर ख़याल रखेंगे और घर के प्रत्येक कार्य को बख़ूबी पूरा करेंगे, जिससे आपका पारिवारिक जीवन सुखी और ख़ुशहाल रहेगा।
प्रथम चरण : इस चरण का स्वामी मंगल हैं। रोहिणी नक्षत्र के पहले चरण में जन्म होने के कारण जातक सौभाग्यशाली होगा. चन्द्रमा और मंगल की मित्रता के कारण धन व् ख्याति योग भी देगा। चन्द्रमा व् मंगल की दशा अन्तर्दशा में जातक की उन्नत्ति होगी लग्नेश शुक्र की दशा उन्नति में विशेष सहायक होगी।
द्वितीय चरण : इस चरण का स्वामी शुक्र हैं। रोहिणी नक्षत्र के दूसरे चरण में जन्म होने के कारण जातक को कुछ न कुछ पीड़ा बनी रहेगी। शुक्र की दशा अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।
तृतीय चरण :इस चरण का स्वामी बुध हैं।रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में जन्म होने के कारण जातक डरपोक और भावुक होगा। चन्द्र व् बुध की दशा अशुभ परन्तु लग्नेश शुक्र की दशा अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।
चतुर्थ चरण :इस चरण का स्वामी चन्द्र हैं। रोहिणी नक्षत्र के चौथे चरण में जन्म होने के कारण जातक जातक सत्यवादी एवं सौन्दर्य प्रेमी होगा। चन्द्रमा की दशा शुभ फल देगी एवं शुक्र की दशा अन्तर्दशा में जातक की विशेष उन्नत्ति होगी।