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श्रवण

श्रवण


श्रवण

🌟 राशि: मकर

🌟 नक्षत्र देवता: विष्णु

🌟 नक्षत्र स्वामी: चंद्र

ज्योतिषशास्त्र के अनुसार, माता-पिता के लिए अपना सर्वस्व त्यागने वाले श्रवण कुमार के नाम पर ही इस नक्षत्र का नाम पड़ा है। इस नक्षत्र में जन्म लेने वाले लोगों में कई विशेषताएं होती हैं जैसे कि इनका ईमानदार होना, इनकी समझदारी, कर्तव्यपरायणता,एक स्थिर सोच, निश्छलता और पवित्र व्यक्ति होते है। ये लोग माध्यम कद काठी परन्तु प्रभावी और आकर्षक व्यक्तित्व के स्वामी है। आजीवन ज्ञान प्राप्त करने की लालसा और समाज के बुद्धिजीवियों में आप की गिनती होती है। ये लोग जिस भी कार्य में हाथ डालते हैं उसमें सफलता हासिल करते हैं। ये लोग कभी अनावश्यक खर्च नहीं करते, जिसकी वजह से लोग इन्हें कंजूस भी समझ बैठते हैं। आप दूसरों के प्रति बहुत अधिक स्नेह की भावना रखते हैं इसलिए औरों से भी उतना ही स्नेह व सम्मान प्राप्त करते हैं।

शिक्षा और आय

30 वर्ष की आयु से आपके जीवन में परिवर्तन आना शुरू होगा। 30 से 45 वर्ष की आयु के बीच जीवन में पूर्ण स्थिरता आएगी। आप मशीनी या तकनीकी कार्य, इंजीनियरिंग, पेट्रोलियम व तैल से जुड़े कार्य, अध्यापक, प्रशिक्षक, उपदेशक, शोधकर्ता, अनुवादक, कथा वाचक, गीत, संगीत व फिल्मों से जुड़े कार्य, टेलीफ़ोन ऑपरेटर, समाचार वाचक, रेडियो व दूरदर्शन से जुड़े कार्य, सलाहकार, मनोचिकित्सक, ट्रैवल एजेंट, पर्यटन व परिवहन से जुड़े कार्य, होटल या रेस्त्राँ कर्मचारी, समाजसेवा से जुड़े कार्य आदि करके जीवनयापन कर सकते हैं।

पारिवारिक जीवन

आपका वैवाहिक जीवन काफ़ी सुखी रहेगा। आपकी जीवनसाथी आपको समझने वाला होगा। वह आपकी अनुपस्थिति में परिवार पूरा ध्यान रखेगा। बच्चों से भी आपको काफ़ी सुख प्राप्त होगा और आपकी संतान उच्च शिक्षा प्राप्त करेगी।

प्रथम चरण : इसका स्वामी मंगल है। नवमांश मेष। यह आकांक्षा, जीवनवृत्ति, सूत्रपात का द्योतक है। जातक गोल नेत्र, चौड़ा ललाट, लम्बी भुजा, दुर्बल अंग, छिदे दांत, तोतला होता है। जातक केन्द्रीभूत, महत्वाकांक्षी, आत्मश्लाधी, बुरे मित्र वाला, विपरीत लिंग के मित्र को शीघ्र बदलने वाला होता है।

द्वितीय चरण :इसका स्वामी शुक्र है। नवमांश वृषभ। यह कूटनीति, नम्रता, युक्ति, अध्यव्यसाय, या दीर्घ प्रयत्न का द्योतक है। जातक ऊँची नाक, बड़ा पेट, श्याम वर्ण, गोल भुजा व जाँघे वाला, सुन्दर, सुवंशी, काम पूरा कर ही चेन लेने वाला, दृढ़ निश्चयी, विद्वान, कूटनीतिज्ञ, मधुर भाषी, पैसो की टकसाल मे कलाविद होता है।

तृतीय चरण :इसका स्वामी बुध है। नवमांश मिथुन। यह लचीलापन, संचार, चालाकी का द्योतक है। जातक कोमल कांति, पतले होंठ, बड़ी दाढ़ी, चौड़ा ललाट, कामी, सुवक्ता, सुन्दर वेशी होता है। जातक मे सभी गुण-दोष होते है। यह अच्छा श्रोता तथा संचार वाहक, शास्त्र कथाओ का श्रोता, ज्ञान की उच्च शाखा का विशेषज्ञ, अधिक पुत्र वाला होता है।

चतुर्थ चरण :इसका स्वामी चन्द्रमा है। नवमांश कर्क। यह चित्त मे भावना की उत्पत्ति या ग्राह्यता, भीड़, उन्मुखता, सहानुभूति का द्योतक है। जातक काला रंग, बड़ा शरीर, कोमल हाथ व पैर, कठोर, सुभाषी, बुद्धिमान, सुशील, सदाचारी, कुछ भावुक, समूह प्रेमी, जन समूह मे संतुलन बनाये रखने वाला, वार्तालाप और गपशप करने वाला, पुरोहित और पूजारी का सम्मान करने वाला, अहंकारी होता है। 20 वा वर्ष धातक होता है।



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